भूमिका
कवि आनंद जाधव के पहले कविता संकलन 'प्रयास' को सबसे पहले मैं बधाई देता हूँ । उनका यह पहला प्रयास भविष्य में स्थापित कवि के रूप में पहला कदम हैं। उनकी कविता पढ़ने पर ज्ञात होता हैं कि अहिन्दी भाषी मिटटी से एक नया पौधा खिला है। जिसने अभी इस सृष्टि में अपना पहला कदम रखा है। वह हँसता है, येता हैं। दुनिया के दर्द को देख कर दुखी भी होता है। वह प्रकृति से प्रेम करता है। ईश्वर से अटूट भक्ति रखता हैं | समाच से अपना एक नाता समझता है। देश के प्रति समर्पण की भावना है। वह गणित, विज्ञान, तकनीकि, पर्यावरण, शिक्षा, भक्ति, समाज, देश, मानव प्रेम आदि की भावनाओं को संवेदनशील रूप में सवसद विवेक बुद्धि से प्रकट करता जाता है | वह कई भावनाओं को आपनी कविता के माध्यम से अभिव्यक्त करता चलाता हैं ।
यह कवि मुक्त छंद में कुशल अभिव्यक्ति कर पता है। तो छंद बद्ध रूप में कविता को प्रस्तुत करने में आगे बढ़ता हुआ नजर आता है । कवि की भाषा सहज-सरल हैं। कहीं भी ऐसा नहीं लगता की कृत्रिमता का प्रयोग यह कवि कर रहा हैं। वह अपने दिल में जो आता हैं, उसे बेबाक रूप में अपने कौशल्य से कागज पर अंकित करता चलता हैं । कवि अपने ईश्वर वंदना करता हैं तो अपनी माँ के प्रति प्रेम भी कविता के माध्यम से प्रकट करता चलता हैं । आपकी कविता विभिन्न पहलुओं को व्यक्त करते चलती हैं। तो वहीं ज्वलंत प्रश्नों को भी पाठक के सम्मुख उपस्थित करती हैं। 'मेरी बिटियाँ' नामक कविता में लड़कियों प्रति प्रेम को अभिव्यक्त करती हैं,
प्यारी सी गुड़ियाँ है, मेरी बेटियाँ। सबकी दुलारी है, मेरी बेटियाँ | जब रखा उसने इस दुनियाँ में कदम भूल गया मैं, अपने सारे गम |
वहीं देश में स्वच्छता जैसे गम्भीर मुद्दे को भी उपस्थित करते चलता हैं।
स्वच्छ भारत, सुंदर भारत, का नारा देती मोदी सरकार | समाज सुधार का व्रत लेकर चल रही है भारत सरकार |
वहीं यह कवि देश में हो रहे पर्यावरण की अधोगति जैसे मुद्दे को भी गम्भीरता से अभिव्यंचित करता हैं। कुल मिलाकर आपकी कविता बहुआयामी विषय को लेकर चलती हैं। और कविता के क्षेत्र में पहला कदम रखती हैं। मैं उनके इस पहले प्रयास को शुभ कामनायें देता हूँ। भविष्य में वे ऐसे ही आगे बढ़ते रहे ।
डॉ. सुनील जाधव, नांदेड
मो. ८६१८४०१३४०/९५३५५०३२३३