Main Banjara Hoon (मैं बंजारा हूँ)

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By Krishna Admin Posted on Feb 26, 2026
In Category - Poems (Kavita)
Dr Sunil Jadhav चन्द्रलोक प्रकाशन 2012
65 Hindi

नांदेड के कवि डॉ. सुनील गुलाबसिंग जाधव जी कविता का सुनहरा गुलदस्ता ‘मैं बंजारा हूँ' लेकर रसिकों के सामने आये हैं।हिंदी कविता के राष्ट्रीय दरबार में मैं उनका स्वागत करता हूँ। हिंदी पाठकों के लिए उनका नाम एकदम अनोखा नहीं है। कानपुर के चन्द्रलोक प्रकाशन से 'नागार्जुन के काव्य में व्यंग' यह उनकी आलोचनात्मक किताब प्रकाशित हुई हैं, जिसकी काफी सराहना की गई है। 'मैं भी इन्सान हूँ।' यह कहानी संग्रह भी पाठकों के हाथों में आ चुका है। समय, समाज और साहित्य का एक दूसरे से जैविक रिश्ता है। कोई भी साहित्य कृति समय एवं समाज की आहट होती हैं। कविता अपने-अपने समय की बेबाक जबान होती हैं। भारतीय समाज के रचना बंध की उसके ढांचे की चर्चा किये बिना 'मैं बंजारा हूँ' काव्य संकलन में जो कवितायें हैं उनकी चर्चा हम नहीं कर सकते।' मैं बंजारा 'काव्य संकलन' में कवि ने जो चुभते सवाल खड़े किये हैं, वह इस समाज एवं संस्कृति की ही देन हैं।

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