Ma Koni Marewal (मैं नहीं मरूँगी)
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175
2026
हिंदी
डॉ. सुनील गुलाब सिंह जाधव की संवेदनशील हिंदी कहानी: म कोनी मरेवाळ ( मैं नहीं मरूँगी )
नमस्ते, साहित्य की दुनिया में कुछ कहानियाँ केवल कागज़ पर नहीं लिखी जातीं।
वे समाज की उन परतों को उधेड़ती हैं, जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।
आज की हमारी कहानी भी ऐसी ही मिट्टी की महक और संघर्ष की दास्तान है।
यह कहानी ली गई है महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित बेहद चर्चित कहानी संग्रह “गोधडी” से।
इसके लेखक हैं डॉ. सुनील गुलाब सिंह जाधव।
डॉ. जाधव ने अपनी लेखनी के माध्यम से बंजारा समाज की जीवंतता और उनके जीवन के अनछुए पहलुओं को बड़ी ही शिद्दत से उभारा है।
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