नमस्ते, आज की कहानी हमें ले चलती है प्रकृती की गोद में बसे उस बंजारा टांडा की ओर जहां परंपराओं की जड़ें बहुत घहरी हैं, और जीवन का संघर्ष बहुत कठिन। सुपरसिद साहितिकार डॉक्टर सुनील गुलाब सिंग जाधव की कलम से निकली ये कहानी है गुंद (गुंध)। ये कहानी है कावेरी की जिसने अपनी ममता की रक्षा के लिए ना केवल अपनी सासुमा की कठोरता का सामना किया बल्की जंगल की यम्दूतों से भी लोहा लिया, क्या कावेरी वो गुंद (गुंध) चिन पाई जिसकी कीमत उसे अपने प्राणों से चुकानी पर सकती थी, आये सुनते हैं साहस और ममत्व की ये अनूठी गाथा गुंद (गुंध) लेखक डॉक्टर सुनील गुलाब सिंग जाधव।
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