The Core (Banjara Visheshank)
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73
Gunjan Agrawal
2018
84
Marathi
जीवन के गीत सुनाते बनजारे
'बनजारा' शब्द जाति का परिचायक न होकर समाज का द्योतक है। यह एक ऐसा समाज है जो एक ही स्थान पर बसकर जीवन-यापन करने के बजाय एक स्थान से दूसरे स्थान पर निरन्तर भ्रमनशील रहता है। बनजारों ने व्यापार, दस्तकारी, आयात-निर्यात और पशु- चारण के जरिए देश को विभिन्न भागों से जोड़ा है। व्यवसाय, शिल्प, वेश-भूषा आदि के कारण प्रान्त प्रान्त में बनजारों के लिए अलग-अलग नाम प्रचलित हो गये । आज भी देश के कोने-कोने में बड़ी संख्या में इस समाज के लोग दिखाई पड़ते हैं।