Banjara-Lambani Samskriti Aur Lok Kalaye
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121
Banjara Prakashana
2005
315
Hindi
“Banjara-Lambani Samskriti Aur Lok Kalaye” banjara ebook by Prof. D. B. Naik highlighting Banjara-Lambani culture, traditions, folk arts, history, customs, language, and community heritage in detailed and authentic way.
पढ़ने से पूर्व
भारत के कई जनजातियों में बंजारा लंबाणी जन जाति भी एक है। आधुनिकता के प्रभाव से आज कई जन जातियाँ अपने अस्तित्व को खो रहे है। कुछ जन जातियाँ अपने मूल वृत्ति से वंचित होकर गरीबी के कारण शोचनीय स्थिति मे हैं। मगर बंजारा-लंबाणी जनजाति आधुनिकता के बीच में भी अपनी अस्मिता बनाये रखने मे सफल है। उनकी भाषा, स्त्रियों की आकर्षक वेषभूषा, धार्मिक-सामाजिक एवं सांस्कृतिक आचरण आज भी देखे जा सकते हैं।
मैं बंजारा लंबाणी जनजाति का हूँ । मैने बंजारा लंबाणी लोक जीवन तथा साहित्य का समाजो - सांस्कृतिक अध्ययन करके पीएच.डी उपाधि प्राप्त की हैं। लंबाणी संस्कृति और साहित्य पर कई ग्रंथों की रचना की है। ये ग्रंथ पाठकों, विद्वानों तथा समाज शास्त्रियों का ध्यान आकर्षित कर सके हैं।